सूसू (susu) क्या है?
सूसू एक घूमने वाला (रोटेटिंग) बचत समूह है, जो पश्चिम अफ़्रीका, ख़ासकर घाना से आया है। इसमें कुछ लोग हर बार एक तय रकम जमा करते हैं, और हर दौर में एक सदस्य को पूरी रकम मिलती है। यह तब तक चलता है जब तक सभी को एक बार रकम न मिल जाए।
इसमें ब्याज नहीं लगता। जिसे पहले रकम मिलती है, वह ज़रूरत के समय पैसे का उपयोग करता है और बाद की किश्तों से उसे चुकाता है।
भारत में इसके दूसरे नाम
भारत और पाकिस्तान में इसी तरह के समूह को कमेटी कहा जाता है। मराठी परिवारों में यह भिशी है, कुछ जगहों पर कुरी, विशी या निधि। ये सब एक ही तरीके के समूह हैं: एक तय रकम, एक तय क्रम, और हर बार एक सदस्य को पूरी रकम।
यह कैसे चलता है
- आयोजक (जिसे अक्सर सबसे भरोसेमंद व्यक्ति चुना जाता है) सदस्यों को जोड़ता है और रकम व तारीख तय करता है।
- क्रम की पर्ची निकालकर या पहले से तय करके सदस्य तय होते हैं।
- हर महीने सभी सदस्य आयोजक को पैसे देते हैं।
- जिसकी बारी हो, उसे पूरी रकम दी जाती है।
रिकॉर्ड रखना क्यों ज़रूरी है
ज़्यादातर झगड़े इस बात पर होते हैं कि किसने कब पैसे दिए और किसकी बारी कब आई। नियम पहले से लिख लें, और हर भुगतान की तारीख के साथ एंट्री रखें।
Savings Circle के साथ
Savings Circle एक रिकॉर्ड बुक है: यह बताती है कि किसने भुगतान किया, अगली बारी किसकी है और किसका बकाया है। यह पैसे नहीं रखती या भेजती। पहला समूह मुफ़्त है, और केवल आयोजक को ऐप चाहिए।